संवादसहयोगी,दातारपुर

नवरात्रकेनौदिनमांकेनौरूपोंकीपूजाहोतीहै।मांकेहररूपकाअलगमहत्वहैऔरउनकापूजनविधिभीउनकेस्वरूपकेअनुसारहै।19अक्टूबरकोनवरात्रकेतीसरेदिनमांचंद्रघंटाकीपूजा-अर्चनाकीजातीहै।आध्यात्मिकविभूतिराजिद्रसिंहजिदाबाबानेकहाअपनेचंद्रघंटास्वरूपमेंमांपरमशांतिदायकऔरकल्याणकारीहैं।उनकेमस्तकमेंघंटेकेआकारकाअर्धचंद्रहै।इसलिएमांकेइसरूपकोचंद्रघंटाकहाजाताहै।इनकेशरीरकारंगस्वर्णकेसमानचमकीलाहै।इनकावाहनसिंहहै।इनकेदसोंहाथोंमेंअस्त्र-शस्त्रहैंऔरइनकीमुद्रायुद्धकीमुद्राहै।मांचंद्रघंटातंभसाधनामेंमणिपुरचक्रकोनियंत्रितकरतीहैऔरज्योतिषमेंइनकासंबंधमंगलग्रहसेहोताहै।इनकीपूजाकरनेसेभयसेमुक्तिमिलतीहैऔरअपारसाहसप्राप्तहोताहै।

कैसेकरेंपूजन:बाबानेकहामांचंद्रघंटाकोलालफूलचढ़ाएं,लालसेबऔरगुड़चढाएं,घंटाबजाकरपूजाकरें,ढोलऔरनगाड़ेबजाकरपूजाऔरआरतीकरें,शुत्रुओंकीहारहोगी।इसदिनगायकेदूधकाप्रसादचढ़ानेकाविशेषविधानहै।इससेहरतरहकेदुखोंसेमुक्तिमिलतीहै।

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By Dawson